घाघरे में जूँ पड़ जाए तो घाघरा नहीं फेंकते : क्या सच में खेती घाटे का सौदा है ?

महेंद्र सिंह भारतीय पुलिस सेवा से निवृत किसान व्यवसायी हैं । वर्तमान में पश्चिमी बंगाल में रहकर खेती करते हैं और सोशल मीडिया पर खेती, खानपान तथा समसामयिक मुद्दों पर खुलकर लिखते हैं । यहाँ आप प्रशनोंत्तर शैली में उनका लेख ‘अगर घाघरे में जूँ पड़ जाए तो घाघरा नहीं फेंकते’ पढ़ सकते हैं : […]

Continue Reading

अनशन करके सरकारों को झुकाना सौ साल पुराना तरीका है

सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके को किसान आंदोलन का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। ज़ब तक कोई आंदोलन ‘अस्तित्व’ और ‘प्राण’ बचाने की प्रेरणा से सम्पन्न नहीं होता, तब तक वह या तो साजिश का हिस्सा हो सकता है या फिर सरल मूर्खता। अगर सोनम वांगचुक मर भी गए तो क्या भारत की जनता दिल्ली की […]

Continue Reading

जंतर मंतर जहाँ तमिलनाडु के किसानों का नग्न प्रदर्शन भी व्यवस्था की नजर में अपराध बन गया था और कॉकरोच जनता पार्टी…?

हाल ही में CJI द्वारा बेरोजगारों को कॉकरोच कहने की प्रतिक्रिया स्वरूप सोशल मीडिया पर बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का 6 जून को दिल्ली के जंतर-मन्तर पर प्रदर्शन हुआ. उसके आयोजकों को लेकर विपक्षी पार्टीयों की राय भी अस्पष्ट ही रही लेकिन देश की न्याय व्यवस्था के सर्वोतम शिखर पर बैठे व्यक्ति के गैर-जिम्मेदाराना और […]

Continue Reading