घाघरे में जूँ पड़ जाए तो घाघरा नहीं फेंकते : क्या सच में खेती घाटे का सौदा है ?

महेंद्र सिंह भारतीय पुलिस सेवा से निवृत किसान व्यवसायी हैं । वर्तमान में पश्चिमी बंगाल में रहकर खेती करते हैं और सोशल मीडिया पर खेती, खानपान तथा समसामयिक मुद्दों पर खुलकर लिखते हैं । यहाँ आप प्रशनोंत्तर शैली में उनका लेख ‘अगर घाघरे में जूँ पड़ जाए तो घाघरा नहीं फेंकते’ पढ़ सकते हैं : […]

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अनशन करके सरकारों को झुकाना सौ साल पुराना तरीका है

सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके को किसान आंदोलन का गंभीर अध्ययन करना चाहिए। ज़ब तक कोई आंदोलन ‘अस्तित्व’ और ‘प्राण’ बचाने की प्रेरणा से सम्पन्न नहीं होता, तब तक वह या तो साजिश का हिस्सा हो सकता है या फिर सरल मूर्खता। अगर सोनम वांगचुक मर भी गए तो क्या भारत की जनता दिल्ली की […]

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